Sunday, April 21, 2013

देखो आया बसंत

देखो आया ऋतुराज बसंत,
मन भावन ऋतुराज बसंत,
फूल खिले और हरियाली छाई,
चीं-चीं करती चिड़िया उड़ती आई
देखो आया ऋतु राज बसंत।

पावन हवा ये बहती जाती,
महक फूलों की साथ ले आती,
तितलियाँ फूलों पर मंडराती,
भौरों की गुन-गुन बढ़ती जाती,
देखो आया मृदुल बसंत।

खुशियाँ सब ओर हैं छाई,
नई उमंग सब में यह लाई,
हरे पत्तों से पेड़ घने हुए,
और बागों में फूल हैं खिले,
देखो आया पुष्पित बसंत।

सूरज की लाली मन को भाए,
मस्त पवन मन को हर जाये,
उन्मुक्त गगन ज्यूं बाहें फैलाए,
धरती को अपने पास बुलाए,
देखो आया मदमस्त बसंत।

© विदिशा पार्थ २०१३