Sunday, April 21, 2013

देखो आया बसंत

देखो आया ऋतुराज बसंत,
मन भावन ऋतुराज बसंत,
फूल खिले और हरियाली छाई,
चीं-चीं करती चिड़िया उड़ती आई
देखो आया ऋतु राज बसंत।

पावन हवा ये बहती जाती,
महक फूलों की साथ ले आती,
तितलियाँ फूलों पर मंडराती,
भौरों की गुन-गुन बढ़ती जाती,
देखो आया मृदुल बसंत।

खुशियाँ सब ओर हैं छाई,
नई उमंग सब में यह लाई,
हरे पत्तों से पेड़ घने हुए,
और बागों में फूल हैं खिले,
देखो आया पुष्पित बसंत।

सूरज की लाली मन को भाए,
मस्त पवन मन को हर जाये,
उन्मुक्त गगन ज्यूं बाहें फैलाए,
धरती को अपने पास बुलाए,
देखो आया मदमस्त बसंत।

© विदिशा पार्थ २०१३

Wednesday, November 21, 2012

नीली फ्रॉक

जन्मदिन के पिछले दिन,
मेरी मामी घर आई।
उपहार स्वरुप वो मेरे लिए ,
इक नीली फ्रॉक लाई।

इतनी सुन्दर फ्रॉक देख कर,
उछल पड़ा मेरा मन,
नाच कूद कर, घूम फिर कर,
कर दिया सबको दंग।

पहन के देखा जब उसको मैंने,
पूरे घर में लगी इठलाने,
क्या भाव होंगे मेरे मित्रों के,
यही सपने मैं लगी सजाने।

जन्मदिन का दिन फिर आया,
पापा ने पूरा घर सजाया।
मम्मी ने खूब खाना बनाया,
भाई मेरा केक भी लाया।

दोस्तों ने आते ही कोहराम मचाया,
सारा घर सर पर उठाया,
मेरी नीली फ्रॉक देख कर,
उनका मन भी ललचाया।

पार्टी के समय जब मैं,
नीली फ्रॉक पहन कर आई,
सबने खूब तारीफ करी और,
सबके मन को मैं ही भाई।

फिर पूछा यह लाई कहाँ से,
परी बन कर तू आई कहाँ से?
मैंने कहा तितलियाँ रंग भारती जहाँ से,
मेरी यह फ्रॉक आई है वहां से।

—विदिशा पार्थ

Thursday, October 25, 2012

मैं और छोटा भीम

कल शाम को मैं अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलने गया। वहां पर कुछ बड़े बच्चे हमें तंग करने लगे। मेरे दो दोस्त उत्कर्ष और ख़ुशी तो रोने ही लगे। तब मुझे लगा कि काश छोटा भीम होता तो इन सबको सबक सिखा देता।

तभी मुझे सामने से छोटा भीम आता हुआ दिखाई दिया। उसे देख कर सब बच्चे मुस्कुराने लगे। छोटा भीम वहां पहुँच कर उन बड़े बच्चों से लड़ने लगा। लेकिन वो चार लोग थे। उन्होंने उसको ज़मीन पर गिरा दिया। छोटा भीम उठा और उसने छुटकी के दिए लड्डू खा कर उन सबको खूब मजा चखाया।

बड़े बच्चे हमसे सॉरी बोलते हुए पार्क से बाहर भाग गए। हम सबने
छोटा भीम को धन्यवाद दिया और सबने कहा कि श्रेय की मम्मी बहुत अच्छे लड्डू बनाती हैं।  हम थैंक यू के तौर पर यही लड्डू उसे खिलायेंगें। मैं भागता भागता मम्मी के पास गया और बोला मम्मी लड्डू दे दो।

मम्मी ने पूछा कि क्यों क्या हुआ?

मैंने कहा
कि छोटा भीम आया हैउसने हमारी मदद की है, उसको देने हैं
 

मम्मी ने प्यार से मुझे गोदी में उठाते हुए कहा, ''पर बेटा! आप तो अपने कमरे से आ रहे हो सो कर"

क्या? छोटा भीम... सपने में...


—श्रेय पार्थ मुख़र्जी

Tuesday, October 16, 2012

मेरी माँ

माँ होती एक मोती जैसी,
पावन सुंदर और महान।
माँ होती एक परी के जैसी,
करती हर मुश्किल आसान।

मेरी माँ है दुर्गा माँ,
दस हाथों से करती काम।
मेरी माँ है सरस्वती माँ,
हमको देती विद्या का वरदान।

मेरी माँ है बहुत ही प्यारी,
राजदुलारी, मैं हूँ उनकी जान।
हम सब उनसे करते प्यार,
वे देती हमें दुनिया का ज्ञान।

घर भर को महका कर रखती,
उनकी हसीं पे सब हो कुर्बान।
पापा हैं उनके सुख-दुःख के साथी,
हम बच्चों में उनके प्राण।

प्रभु का दूजा रूप बन कर,
इस धरती पर आई माँ।
ममता की बदली बरसाने,
इस धरती पर आई माँ।

—विदिशा पार्थ

मेरी निराली दुनिया प्यारी

एक चीज़ है मुझे सबसे प्यारी,
टॉम एंड जेरी से अपनी यारी।
यूं तो बिल्ली है चूहे की दुश्मन,
पर इसमें हरदम जेरी है भारी।

और जिसे देख मैं हँसता जाऊं,
डोरेमोन, नोबिता की दुनिया है न्यारी,
डोरेमोन और गैजेट नोबिता के साथी,
जियान सुनियों से जंग है जारी।

पावर रेंजेर से ध्यान हटे न,
हँसने के बाद अब आई एक्शन की बारी,
कैम है कंप्यूटर का एक्सपर्ट,
बाकी सबकी है लड़ने की जिमेदारी।

बेन 10 और गोएन की बात अनूठी,
दोनों करते कितनी कलाकारी,
दादू उनके है असली हीरो,
केवन संग मिलकर बने टीम ये भारी।

फिनियस और फ़र्ब है बिलकुल मेरी कॉपी
कैंडिस को तंग करने की करते तैयारी,
मेरी मम्मी की तरह वो भी परेशां रहती,
तीनों जब करते आपस में मारामारी।

© उपमा डागा