Thursday, October 25, 2012

मैं और छोटा भीम

कल शाम को मैं अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलने गया। वहां पर कुछ बड़े बच्चे हमें तंग करने लगे। मेरे दो दोस्त उत्कर्ष और ख़ुशी तो रोने ही लगे। तब मुझे लगा कि काश छोटा भीम होता तो इन सबको सबक सिखा देता।

तभी मुझे सामने से छोटा भीम आता हुआ दिखाई दिया। उसे देख कर सब बच्चे मुस्कुराने लगे। छोटा भीम वहां पहुँच कर उन बड़े बच्चों से लड़ने लगा। लेकिन वो चार लोग थे। उन्होंने उसको ज़मीन पर गिरा दिया। छोटा भीम उठा और उसने छुटकी के दिए लड्डू खा कर उन सबको खूब मजा चखाया।

बड़े बच्चे हमसे सॉरी बोलते हुए पार्क से बाहर भाग गए। हम सबने
छोटा भीम को धन्यवाद दिया और सबने कहा कि श्रेय की मम्मी बहुत अच्छे लड्डू बनाती हैं।  हम थैंक यू के तौर पर यही लड्डू उसे खिलायेंगें। मैं भागता भागता मम्मी के पास गया और बोला मम्मी लड्डू दे दो।

मम्मी ने पूछा कि क्यों क्या हुआ?

मैंने कहा
कि छोटा भीम आया हैउसने हमारी मदद की है, उसको देने हैं
 

मम्मी ने प्यार से मुझे गोदी में उठाते हुए कहा, ''पर बेटा! आप तो अपने कमरे से आ रहे हो सो कर"

क्या? छोटा भीम... सपने में...


—श्रेय पार्थ मुख़र्जी

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